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Showing posts from December, 2018

2016.....

2016..... बड़ी मुश्किल थी उससे अपने दिल की बात कहना ,   पर दिल ने मजबूर कर दिया  सोचा नहीं था कभी खवाबो में की वो मेरे साथ होगा ,    उसका हमसे प्यार जाताना  घर न जाने के बहाने बनाना ,   न जाने क्यों दिल को अच्छा लगता था उसके साथ वक़्त बिताना  प्यार होते हुए भी एहसास न हुआ मुझे,   चली गयी मैं तनहा छोड़ कर  उसे  दिल में चिंता मेरे भी थी ,    आँखों में नमी  मेरे भी थी  पर चेहरे पर लायी नहीं ,   मैंने सोचा बहुत था फिर न मिला  फोन किया उसको मैंने ,   पर मुँह से आवाज़ नहीं आयी  वो रोता रहा उधर मैं रोती रही इधर ,   दोनों को कहना बहुत कुछ था पर कोई कह न सका  बनाया नहीं था कभी मैंने सॉरी कार्ड,  न लिखी थी शायरी किसी के लिए  पर बनाया मैंने सॉरी कार्ड ,    और उसमे लिख डाली दिल की हर एक बात  दोस्तों का हमे एक दूसरे को लेकर चिढ़ाना अच्छा लगने लगा था ,    जब जोड़ता था कोई उसके नाम से मेरा नाम वो भी सच्चा लगने लगा था...