2016..... बड़ी मुश्किल थी उससे अपने दिल की बात कहना , पर दिल ने मजबूर कर दिया सोचा नहीं था कभी खवाबो में की वो मेरे साथ होगा , उसका हमसे प्यार जाताना घर न जाने के बहाने बनाना , न जाने क्यों दिल को अच्छा लगता था उसके साथ वक़्त बिताना प्यार होते हुए भी एहसास न हुआ मुझे, चली गयी मैं तनहा छोड़ कर उसे दिल में चिंता मेरे भी थी , आँखों में नमी मेरे भी थी पर चेहरे पर लायी नहीं , मैंने सोचा बहुत था फिर न मिला फोन किया उसको मैंने , पर मुँह से आवाज़ नहीं आयी वो रोता रहा उधर मैं रोती रही इधर , दोनों को कहना बहुत कुछ था पर कोई कह न सका बनाया नहीं था कभी मैंने सॉरी कार्ड, न लिखी थी शायरी किसी के लिए पर बनाया मैंने सॉरी कार्ड , और उसमे लिख डाली दिल की हर एक बात दोस्तों का हमे एक दूसरे को लेकर चिढ़ाना अच्छा लगने लगा था , जब जोड़ता था कोई उसके नाम से मेरा नाम वो भी सच्चा लगने लगा था...
Poetries from my side...