पापा की परी..... पापा की परी बन कर आसमान में उड़ती है बेटियाँ, न कोई बंदिशें न कोई रुकावटे होती है बस हम, पापा का प्यार और आज़ादी होती है, गलती करने पर पापा थोड़ा गुस्साते है पर मन ही मन वो ही सबसे ज़्यादा प्यार जताते है, कंधे पर बैठा कर पूरी दुनिया घूमाते है ऊँगली पकड़ कर पापा ही चलना सिखाते है, रोटियां जली हो या सब्जी कच्ची हो फिर भी पापा को उस खाने में स्वाद लगता है, क्योंकी वो खाना बेटियों के हाथों से बना होता है पापा ही तो है जो बेटियों के हर नखरे उठाते है, पापा ही तो है जो बेटियों को परी कह कर बुलाते है अपने लिए एक जोड़ी कपडे भी न लाते वो, और बेटी के जन्मदिन पर ऐसा लगता है कि पूरी बाजार ही उठा लाये है, ऐसे होते है पापा !!!!!
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