एक औरत की कहानी......... एक औरत की है यही कहानी , खुद की नही करती वो मनमानी हाथ उसके चूड़ी पति के नाम की पहनती है , मांग उसकी सिन्दूर पति के नाम का भरती है क्या है उसका इस भीड़ भरी दुनिया में , मायका उसका पर वो माँ का घर हो जाता है ससुराल उसका पर वो पति का घर कहलाता है , कुछ होती है जिनका नसीब होता है है खिला कुछ को तो किस्मत से भी कुछ नही मिला , दुनिया में आई है औरत माँ बहन बेटी बनकर ख़ुशी मिलती है शैतानो को इनके साथ हैवानियत करकर , सारे जहाँ में होती है बेटियों की हत्या निकलती है इनकी हर रोज़ मिट्टिया , जिसने तुझे पैदा किया वो ममता की मूरत है जिसने बाँधी राखी तुझे उसको तेरी ज़रुरत है , औरत के दर्द से दर्द नही होता क्योंकी वो खुद को मर्द है समझता , सारे जहाँ को उसकी ज़रुरत है क्योंकी वो ममता की मूरत है , सबको इसकी ज़रुरत है तेरी आखों में वो खटकी है ...
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