दोगली दुनिया..... दोगली दुनिया है, मतलब का संसार है यहाँ मतलब के लिए, हर किसी को एक दूसरे से प्यार है मतलब पड़ने पर तू मेरा यार है, उसके बाद तेरी मेरी दोस्ती बेकार है शायद यही ज़िंदगी की रीत है, और इसी पर सबको एतबार है यहाँ कहने को तो सब अपने है, पर मुखौटा सबने पहना होता है चलने को तो साथ सब चल लेते है, क्योंकि ये सच का चोला सबने ओढ़ा होता है मुसीबत में जो साथ खड़ा हो, वो सच्चा यार है मतलब तो मतलब पड़ने पर है, वरना ये दुनिया ही बेकार है तू मेरा यार है, मैं तेरा यार हूँ ये शब्द सुनने में तोअच्छे लगते है, आती है जब इंसानियत की बारी तो यही शब्द कानों में चुभने लगते है !!!!!
Poetries from my side...