कैसे समझाऊँ ..... कैसे समझाऊँ सबको अपने जज़्बात, कैसे बताऊ सबको अपने दिल की बात लोगो की छोटी सोच के आगे हारना पड़ता है, अपनी ही सही बात को नकारना पड़ता है कोई समझ सके तो समझाऊँ उसे, सोचती हूँ दिल की बात बताऊ किसे अपने ही नहीं समझते जब दर्द अपना, टूटा हुआ नज़र आता है हर सपना कोई साथ दे तो आगे बढ़ जाऊ, मुश्किलों में साथ खड़ा मैं उसे ही पाऊं मंज़िलो तक पहुंचाने में जिसका हाथ हो, ज़िन्दगी के सफर में भी उसका ही साथ हो जब बड़े ही न समझे बच्चो के जज़्बात, तो कोई कैसे बताये बड़ो को अपने दिल की बात कैसे समझाऊँ सबको अपने जज़्बात, कैसे बताऊ सबको अपने दिल बात !!!!!
Poetries from my side...