एक लड़की ...... इंसानियत इंसान दिखाते है, हैवानियत हैवान दरिंदगी दरिंदे दिखाते है, और मनमनाइयाँ मनचले फिर भी बदनाम लड़कियां हो जाती है, कोई कहता है छोटे कपडे पहनती है कोई कहता है रात में पार्टी में जाती है, कोई ये क्यों नहीं कहता की उन्हें भी जीने का हक़ है लड़कियां भी तो इंसान है, फिर भी हर किसी को उन पर ही शक है सारा जमाना लड़कियों को ही कहता है, गलत हो जाने पर उनके परिवार पर ही पत्थर फेंकता है बेटो को घर का चिराग कहने वाले लोग, ये क्यों नहीं कहते की घर की रोशनी तो बेटियाँ होती है पर लोग ये क्यों भूल जाते है, उस चिराग को रोशन तो एक लड़की ने ही किया है जिसने हर दर्द सह कर भी, हर इल्ज़ाम अपने ऊपर लिया है !!!!!
Poetries from my side...