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Showing posts from July, 2020

Aaj bahut dino baad main usse mili.....

आज बहुत दिनों बाद मैं उससे मिली..... बहुत दिनों बाद मैं उससे मिली,   जिससे मैं बरसो से न मिली  वो फूल भी मुरझा गया,   जिसकी कली अब तक न खिली                                                                               बहुत दिन बीत गए अब तक वो दिखाई दी नहीं,   बहुत दिन बीत गए उसकी आहट भी सुनाई दी नहीं  छूट गया जो पीछे वो उसका वजूद था,   जो नहीं चाहा वो उसमे मौजूद था  बहुत दिनों बाद जिससे मिली थी,   वो खुद मैं थी  रह गया मुझ में कुछ अधूरा,   जिसे मैं अब तक नहीं कर पाई पूरा  बहुत दिनों बाद मैं खुद से मिली थी,   बहुत दिनों बाद मैं फूल जैसे खिली थी  मुझ में ही कहीं मैं खो रही थी,   अंदर ही अंदर बस रो रही थी  बहुत दिनों बाद मैं उससे मिली,   जिससे मैं बरसो से न मिली...

Soch.....

सोच.....         जैसा सोच रहे हो तुम,   उतने आज़ाद नहीं है हम  पिंजरे जैसी इस ज़िन्दगी में,  उतने आबाद नहीं है हम   जैसा सोच रहे हो तुम, उतने आज़ाद नहीं है  हम    पिंजरे में रह कर मिलता तो सब है,  बस इस पिंजरे पर ही मेरा हक़ है   इस पिंजरे में रह कर  देखती  रहती हूँ दिन और रात, कब आज़ाद हो जाउंगी बस सोचती रहती हूँ यही एक बात    जैसा सोच रहे हो तुम, उतने आज़ाद नहीं है हम   पिंजरे से बाहर निकलने की कोशिश में, सब रिश्ते नाते टूट गए   जितना सबको साथ रखा, मन से उतना ही टूट गए   जैसा सोच रहे हो तुम, उतने आज़ाद नहीं है हम    छोटी सोच के इस दरवाज़े पर इंसान अँधेरा ही पता है, और ज़िन्दगी की इस भीड़ में अकेला ही रह जाता है   सोच ही इंसान की इंसानियत को बताती है, सोच ही इंसान को आगे लेकर जाती है   जैसा सोच रहे हो तुम, उतने आबाद नहीं है हम जैसा सोच रहे हो तुम, उतने आज़ाद नहीं है हम  उतने आज़ाद नहीं है हम !!!!!!!