एक कप चाय.....
एक कप चाय भी नसीब नहीं होती साथ में,
और ज़िन्दगी साथ बिता रहे है
कभी कभी ऐसा लगता है,
की फूल बन कर काँटों के बीच मुस्कुरा रहे है
एक कप चाय भी नसीब नहीं होती साथ में,
बस एक दूसरे का साथ दिए जा रहे है
कभी कभी तो तन्हा ही मुस्कुरा लेते है,
बस यू हीं ज़िंदगी जिए जा रहे है
एक कप चाय भी नसीब नहीं होती साथ में,
बस एक दूसरे को देख कर मुस्कुराये जा रहे है
ज़रूरतें तो सारी पूरी होती है,
बस ख्वाशियों को दिल में दबाए जा रहे है
एक कप चाय भी नसीब नहीं होती साथ में,
और सपने संजोये जा रहे है
फुरसत तो चाय पीने की भी नहीं है,
और सपने कॉफ़ी कैफ़े के सजाये जा रहे है !!!!!

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