Ek Kinara.........
एक दरिया था एक किनारा था ,
घर था कच्चा मगर हमारा था
एक नदी थी दोनों किनारों को थाम के ले जाती थी ,
तोडती तो सैलाब आ जाता
करवट लेती तो ज़मीन बह जाती ,
एक किनारा दुसरे किनारे से मिलता नही कभी
दुःख में तो साथ छोड़ देते है सभी ,
दो किनारों से मिल कर बनता है समुंदर
जग में उजाला फैलता है अम्बर ,
एक दरिया था और एक किनारा था
घर था कच्चा मगर हमारा था !!!!!!!!!!!!


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