Poetry On Father....... P1
कभी अभिमान तो कभी स्वाभिमान है पिता ,
जन्म देती है माँ पर
जिससे जानेगा जग वो पहचान है पिता ,
माँ तो कह देती है अपने दिल की बात
सब कुछ समेट कर अकेले है पिता ,
पिता से परिवार में है प्रतिपल राग है
पिता से ही माँ का बिंदी और सुहाग है ,
मेरा साहस मेरी इज्ज़त मेरा सम्मान है पिता
मेरी ताकत मेरी पूंजी मेरी पहचान है पिता ,
माँ घर का गौरव है
तो पिता घर का आस्तिव होते है ,
सारी ख़ुशी मिल जाती है जब मिल जाता है पापा का प्यार
मेरे चेहरे को मुस्कान मिल जाती है ,
जब मिल जाता है पापा का प्यार!!!!!!

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