Ek Adhuri Khawahish.........
एक खवाहिश है अधूरी सी ,
कुछ बातें है बाकि
कुछ पूरी है तो कुछ है अधूरी सी ,
मैं नासमझ ही सही पर वो तारा हूँ
जो एक खवाहिश के लिए सौ बार टूट जाये ,
खावाहिशो को मिल जाता है घर
कुछ खवाहिशे हो जाती है बेघर ,
हसरत पूरी न हो न सही
पर खवाहिशे करना कोंई गुनाह तो नही ,
ऐ -उठते हुए खावाहिशो का जलजला
ये वक़्त जरा थम के चला !!!!!!!!!!😊😊
एक खवाहिश है अधूरी सी ,
कुछ बातें है बाकि
कुछ पूरी है तो कुछ है अधूरी सी ,
मैं नासमझ ही सही पर वो तारा हूँ
जो एक खवाहिश के लिए सौ बार टूट जाये ,
खावाहिशो को मिल जाता है घर
कुछ खवाहिशे हो जाती है बेघर ,
हसरत पूरी न हो न सही
पर खवाहिशे करना कोंई गुनाह तो नही ,
ऐ -उठते हुए खावाहिशो का जलजला
ये वक़्त जरा थम के चला !!!!!!!!!!😊😊

Comments
Post a Comment