एहसास...........
जिसको हो जाये अपनी गलती का एहसास ,
वो हो जाता है खास
दुःख देने के बाद ,
क्यों पकड़ना किसी का हाथ
दुःख देने से पहले नही सोचते है लोग ,
माँ - बाप को घर से निकाल कर सजा भोगते है लोग
बच्चो को
चोट लगने पर माँ-बाप को होता है दुःख ,
वही बच्चे नही दे पाते माँ-बाप को सुख
वो
माँ-बाप को छोड़ देते है वर्द्ध आश्राम
,
कहते है
यही करो आप लोग आराम
नही होता बच्चो को एहसास उस दर्द का ,
नही होता एहसास उनको अपने फ़र्ज़ का
बच्चो को
माँ-बाप विदेश भेजते है पढने के लिए ,
पर बच्चे
चले जाते है उन्हें छोड़ कर वहाँ बसने के लिए ,
होता है
बच्चो को अपनी गलती का एहसास तब
जब उनके बच्चे कहते है वक़्त हमारा है अब ,
न करो इस
तरह बेइज़्ज़त माँ-बाप को
की एहसास भी न हो अपने आप को ,
जिसको हो जाये अपनी गलती का एहसास ,
वो हो जाता है खास
!!!!!!!

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