एक औरत की कहानी.........
एक औरत की है यही कहानी ,
खुद की नही करती वो मनमानी
हाथ उसके चूड़ी पति के नाम की पहनती है ,
मांग उसकी सिन्दूर पति के नाम का भरती है
क्या है उसका इस भीड़ भरी दुनिया में ,
मायका उसका पर वो माँ का घर हो जाता है
ससुराल उसका पर वो पति का घर कहलाता है ,
कुछ होती है जिनका नसीब होता है है खिला
कुछ को तो किस्मत से भी कुछ नही मिला ,
दुनिया में आई है औरत माँ बहन बेटी बनकर
ख़ुशी मिलती है शैतानो को इनके साथ हैवानियत करकर ,
सारे जहाँ में होती है बेटियों की हत्या
निकलती है इनकी हर रोज़ मिट्टिया ,
जिसने तुझे पैदा किया वो ममता की मूरत है
जिसने बाँधी राखी तुझे उसको तेरी ज़रुरत है ,
औरत के दर्द से दर्द नही होता
क्योंकी वो खुद को मर्द है समझता ,
सारे जहाँ को उसकी ज़रुरत है
क्योंकी वो ममता की मूरत है ,
सबको इसकी ज़रुरत है
तेरी आखों में वो खटकी है ,
क्योंकी वो एक लड़की है
एक औरत की है यही कहानी ,
खुद की नही करती वो मनमानी !!!!!!!!!

Comments
Post a Comment