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Ek aaurat ki kahani.........


एक औरत की कहानी.........


एक औरत की है यही कहानी ,
   खुद की नही करती वो मनमानी 
हाथ उसके चूड़ी पति के नाम की पहनती है ,
   मांग उसकी सिन्दूर पति के नाम का भरती  है
क्या है उसका इस भीड़ भरी दुनिया में ,
   मायका उसका पर वो माँ का घर हो जाता है 
ससुराल उसका पर वो पति का घर कहलाता है ,
   कुछ होती है जिनका नसीब होता है है खिला 
कुछ को तो किस्मत से भी कुछ नही मिला ,
   दुनिया में आई है औरत माँ बहन बेटी बनकर 
ख़ुशी मिलती है शैतानो को इनके साथ हैवानियत करकर ,
     सारे जहाँ में होती है बेटियों की हत्या 
निकलती है इनकी हर रोज़ मिट्टिया ,
   जिसने तुझे पैदा किया वो ममता की मूरत है 
जिसने बाँधी राखी तुझे उसको तेरी ज़रुरत है ,
    औरत के दर्द से दर्द नही होता 
क्योंकी वो खुद को मर्द है समझता ,
   सारे जहाँ को उसकी ज़रुरत है 
क्योंकी वो ममता की मूरत है ,
    सबको  इसकी ज़रुरत है
तेरी आखों में वो खटकी है ,
  क्योंकी वो एक लड़की है 
एक औरत की है यही कहानी ,
   खुद की नही करती वो मनमानी !!!!!!!!!





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 जिस दिन तेरा विश्वास डगमगा गया.....  जिस दिन तेरा विश्वास डगमगा गया,   उस दिन रिश्ते संभाल नहीं पाओगे  जब होश आएगा तुम्हे,   बस पछताते ही रह जाओगे  जिस दिन तेरा विश्वास डगमगा गया,   विश्वास की डोर भी टूट जाएगी  और तेरी हिम्मत भी तुझसे रूठ जाएगी,   और तेरी आत्मा भी खुद को अकेला पायेगी  जिस दिन तेरा विश्वास डगमगा गया,   उस रिश्ते की नींव हिल जाएगी  वो डोर तो दोबारा जुड़ जाएगी,   पर उसमे एक गांठ हमेशा रह जाएगी  जिस दिन तेरा विश्वास डगमगा गया,   तू अकेला ही रह जायेगा  इस भीड़ भरी दुनिया में,   बस भटकता ही रह जायेगा  जिस दिन तेरा विश्वास डगमगा गया,   तू प्यार भरे रिश्तो को खो देगा  तू अकेला ही रह जायेगा,   और पल भर में ही रो देगा  जिस दिन तेरा विश्वास डगमगा गया,    तू रिश्तो को बाँध नहीं पायेगा  सारे रिश्ते बिखर जायेंगे,   और बस तू पछताता ही रह जायेगा !!!!!