गुस्सा.........
गुस्से में इंसान खो देता अपनों को ,
गुस्से में ही वो तोड़ देता है अपने सपनो को
माँ का गुस्सा दिल को है दुखाता ,
आँखों से आँसू है बहाता
पापा का प्यार दिल को है हँसाता ,
हमेशा सही राह दिखाता
गुस्सा इंसान को दीमक की तरह है खाता ,
गुस्से में इंसान के हाथ कुछ नही आता
गुस्से को रखो ज़िन्दगी से बाहर ,
इससे ज़िन्दगी में रहेगी खुशियों की बहार
गुस्से में इंसान खो देता अपनों को ,
गुस्से में ही वो तोड़ देता है अपने सपनो को !!!!!!
गुस्से में इंसान खो देता अपनों को ,
गुस्से में ही वो तोड़ देता है अपने सपनो को
माँ का गुस्सा दिल को है दुखाता ,
आँखों से आँसू है बहाता
पापा का प्यार दिल को है हँसाता ,
हमेशा सही राह दिखाता
गुस्सा इंसान को दीमक की तरह है खाता ,
गुस्से में इंसान के हाथ कुछ नही आता
गुस्से को रखो ज़िन्दगी से बाहर ,
इससे ज़िन्दगी में रहेगी खुशियों की बहार
गुस्से में इंसान खो देता अपनों को ,
गुस्से में ही वो तोड़ देता है अपने सपनो को !!!!!!

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