अनाथ बच्चे.....
जन्नत मांगी खुदा से सबने,
हमने मांगे माँ-बाप है
हमारे पास घर भी नहीं है,
महलों की सबको आस है
न लोरी सुनाने वाली माँ,
न चॉक्लेट दिलाने वाले पापा है
बचपन से न देखा माँ-बाप को,
न पहचाना अपने आप को
माँ-बाप से दूरियां तकलीफ देती है,
बच्चो से खुशियां छीन लेती है
घूमते है पागल बनकर सड़को पर,
सोचते है माँ-बाप बिठा ले पलकों पर
पर ये तो सपना सा रह जाता है,
जब अनाथ होने का सच सामने आता है
जन्नत मांगी खुदा से सबने,
हमने मांगे माँ-बाप है
हमारे पास घर भी नहीं है,
महलों की सबको आस है !!!!!
जन्नत मांगी खुदा से सबने,
हमने मांगे माँ-बाप है
हमारे पास घर भी नहीं है,
महलों की सबको आस है
न लोरी सुनाने वाली माँ,
न चॉक्लेट दिलाने वाले पापा है
बचपन से न देखा माँ-बाप को,
न पहचाना अपने आप को
माँ-बाप से दूरियां तकलीफ देती है,
बच्चो से खुशियां छीन लेती है
घूमते है पागल बनकर सड़को पर,
सोचते है माँ-बाप बिठा ले पलकों पर
पर ये तो सपना सा रह जाता है,
जब अनाथ होने का सच सामने आता है
जन्नत मांगी खुदा से सबने,
हमने मांगे माँ-बाप है
हमारे पास घर भी नहीं है,
महलों की सबको आस है !!!!!

I love this poem...and writer too
ReplyDelete