आज बहुत दिनों बाद मैं उससे मिली.....
बहुत दिनों बाद मैं उससे मिली,
जिससे मैं बरसो से न मिली
वो फूल भी मुरझा गया,
जिसकी कली अब तक न खिली
बहुत दिन बीत गए अब तक वो दिखाई दी नहीं,
बहुत दिन बीत गए उसकी आहट भी सुनाई दी नहीं
छूट गया जो पीछे वो उसका वजूद था,
जो नहीं चाहा वो उसमे मौजूद था
बहुत दिनों बाद जिससे मिली थी,
वो खुद मैं थी
रह गया मुझ में कुछ अधूरा,
जिसे मैं अब तक नहीं कर पाई पूरा
बहुत दिनों बाद मैं खुद से मिली थी,
बहुत दिनों बाद मैं फूल जैसे खिली थी
मुझ में ही कहीं मैं खो रही थी,
अंदर ही अंदर बस रो रही थी
बहुत दिनों बाद मैं उससे मिली,
जिससे मैं बरसो से न मिली
वो फूल भी मुरझा गया,
जिसकी कली अब तक न खिली

magar tum milke bhi nhi mili
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