हैवानियत.....
कब तक ज़िंदा रखोगे हैवानियत,
अब तो ले आओ अपने अंदर इंसानियत
कब तक अपनी हैवानियत दिखाते रहोगे,
कब तक मासूमों को दबाते रहोगे
वो भी किसी की बहन किसी की बेटी होती है,
जो हैवानियत सहने के बाद कब्र में सोती है
वो छोटी सी जान जिसने अभी दुनिया भी नहीं देखी,
उसने तुम्हारी हैवानियत को सहा
इतना दर्द सह कर भी उस मासूम ने कुछ नहीं कहा,
कब तक सहती रहेंगी ये बेटियाँ,
कब तक निकलती रहेंगी इनकी मिट्टियाँ
क्यों हैवानो की हैवानियत बढ़ती जा रही है,
क्यों ये दुनिया इतनी सड़ती जा रही है,
क्यों बेटियाँ अब तक आज़ाद नहीं हो पाई
क्यों वो इतना सह कर कुछ नहीं कह पाई,
अधूरे रह गए उनके सपने
टूट गए उनके अपने,
लोगो के सामने गुहार लगाई
हर किसी को पुकार लगाई,
कब तक ज़िंदा रखोगे हैवानियत
अब तो ले आओ अपने अंदर इंसानियत !!!!!

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