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Ishq....

इश्क़..... 


इश्क़ ! क्या है ये इश्क़,
  क्या ये दो लोगो के बीच  का सिर्फ प्यार है 
या फिर ये दो लोगो के बीच का सिर्फ इकरार है,
  आखिर है क्या ये इश्क़ 
अब मैं क्या बताऊ की आखिर है क्या ये इश्क़,
  कमब्खत दर्द भी देता है और सुकून भी 
लोग कहते है जो इश्क़ में रोता है,
  उसकी आहट भी नहीं सुनाई देती 
तो ये इश्क़ का शोर इतनी दूर तक कैसे होता है,
  ये इश्क़ है बड़ी कमब्खत चीज़ 
ऐसा शोर उठता है दिल में,
  जिसे खुद छोड़ कर सारा जमाना पहचान लेता है 
हम तो बस हाथ की कठपुतली है,
  कभी ये इश्क़ नचाता है तो कभी ऊपरवाला 
पर अगर इस नाच के खेल में,
  कोई हमसफ़र मिल जाता है 
तो इश्क़ मुक्कमल हो जाता है,
  लोग कहते है इश्क़ के राज बड़े गहरे होते है 
पर ये गहरे राज ही तो गहरे निशान छोड़ जाते है,
  इश्क़ एक ख़ूबसूरत मंज़िल भी है 
और न मिलने वाला रास्ता भी,
  बस ये समझ लीजिये जनाब की मंज़िल को पाने के लिए मुश्किलें बहुत है 
और मंज़िल मिलने पर सुकून का अपना ही मज़ा है,
  बस इतना ही है ये इश्क़ !!!!!





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