दर्द.....
दर्द देने वाला ही दवा बन जाता है,
दर्द कितना भी दे वो
पर सुकून फिर भी वही बन जाता है,
आँसुओं की वजह तो बनता वही है
पर ख़ुशी का पल भी वही लाता है,
दर्द देने वाला ही दवा बन जाता है
आँसुओं की कश्ती पर बैठाल देता है,
फिर खुद ही उस कश्ती को पर लगाता है
और फिर प्यार भरे लम्हो को,
बहुत प्यार से सजाता है
गुस्से में चाहे कितना कुछ कहे दे वो,
पर एक ही पल में गुस्सा शांत हो जाता है
जब वो मुझे गले से लगाता है,
दर्द देने वाला ही दवा बन जाता है
दर्द कितना भी दे वो मुझे,
पर चोट उससे खुद भी लगती है
मान तो वो पल भर में ही जाता है,
नाराज़ कितना भी हो वो मुझसे
दर्द देने वाला ही दवा बन जाता है,
दर्द कितना भी दे वो
पर सुकून फिर भी वही बन जाता है,

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